भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के बाद भारतीय किसानों, कृषि बाजार और व्यापार संतुलन पर संभावित प्रभाव का विश्लेषण।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के बाद भारतीय किसानों, कृषि बाजार और व्यापार संतुलन पर संभावित प्रभाव का विश्लेकुछ दिन पहले भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हो गया। अमेरिकी पक्ष इसे “हमारे किसानों के लिए बड़ा मौका” बता रहा है, जबकि भारत सरकार कह रही है कि दूध, गेहूँ, चावल, सोयाबीन जैसी संवेदनशील चीजें पूरी तरह सुरक्षित हैं।
फिर भी किसान संगठन, व्यापारी और कई अर्थशास्त्री कह रहे हैं – “देखते हैं आगे क्या होता है।”

पिछले कुछ सालों का व्यापार (सिर्फ माल का, अरब डॉलर में)
| साल | भारत से निर्यात (अरब $) | अमेरिकी से आयात (अरब $) | भारत का अधिशेष |
| 2021 | ~$78 अरब | ~$42 अरब | +$36 अरब |
| 2022 | ~$85 अरब | ~$47 अरब | +$38 अरब |
| 2023 | ~$84 अरब | ~$40 अरब | +$44 अरब |
| 2024 | ~$87 अरब | ~$41.5 अरब | +$45.5 अरब |
| 2025 | कुल व्यापार ~ 132 अरब | – | ~$40-45 अरब |
स्रोत: US Census Bureau, USTR, और वाणिज्य मंत्रालय)
अमेरिका से भारत में आने वाले मुख्य कृषि उत्पाद (जिन पर अब टैरिफ कम/जीरो हो रहा है)
सोयाबीन ऑयल
बादाम, अखरोट, पिस्ता (tree nuts)
सेब, चेरी, संतरा आदि फल
रेड सोरघम (पशु चारा)
DDGS (इथेनॉल का बाय-प्रोडक्ट, पशु आहार)
वाइन और स्पिरिट्स
क्या मिला, क्या गया?
भारत ने अमेरिकी औद्योगिक सामान और ऊपर बताए कुछ कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटा दिए या जीरो कर दिए।
अमेरिका ने भारतीय सामान पर 18% टैरिफ रखा है (कुछ चीजों पर हटाया भी है)।
किसानों को डर है कि सस्ता अमेरिकी DDGS, सोयाबीन ऑयल और नट्स आकर घरेलू बाजार में दबाव डाल सकते हैं।
पोल्ट्री और डेयरी वाले थोड़ा खुश हैं क्योंकि DDGS सस्ता चारा मिल जाएगा।
सोयाबीन किसान और मिल वाले नाराज हैं।
नेताओं ने क्या कहा:
अमेरिकी कृषि सचिव: “भारत का बाजार अब हमारे किसानों के लिए खुल गया है।”
पीयूष गोयल: “दूध, गेहूँ, चावल, मक्का, सोयाबीन, पोल्ट्री, मीट – इनमें कोई छूट नहीं दी। संवेदनशील सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित हैं। हमने अपने किसानों के हित पहले रखे।”
आखिर में
अल्पकाल में भारतीय निर्यातकों को कुछ फायदा हो सकता है – खासकर मसाले, चाय-कॉफी, फल, समुद्री उत्पाद।
लेकिन लंबे समय में सस्ते आयात से कुछ फसलों और छोटे किसानों पर दबाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।
किसान संगठन पहले ही विरोध की बात कर रहे हैं। सरकार कह रही है कि “कैलिब्रेटेड” तरीके से खोला गया है, यानी बहुत ज्यादा नहीं आएगा।
अब देखना है कि असल में क्या होता है।
Advocate | Political Analyst | Public Policy Commentator
Co-Founder – Samvidhan First | AgriBuySell